Raipur News : रायपुर संभाग आयुक्त महादेव कावरे ने किया राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन; जशपुर के ‘चाय मॉडल’ का दिया उदाहरण

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Raipur News : रायपुर: “विकसित भारत एवं सतत विकास : अवसर और चुनौतियाँ” विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि महादेव कावरे संभागायुक्त, रायपुर संभाग द्वारा किया गया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए समावेशी, सतत एवं क्षेत्रीय संतुलित विकास आवश्यक है, विशेष रूप से पिछड़े और आदिवासी क्षेत्रों पर केंद्रित प्रयासों के साथ।

उन्होंने अवसंरचना विकास, कौशल उन्नयन तथा सामुदायिक सहभागिता को अविकसित क्षेत्रों को विकास के केंद्र में परिवर्तित करने के प्रमुख स्तंभ बताया। पूर्व कलेक्टर जशपुर के रूप में अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि जिले में चाय बागानों के प्रोत्साहन से स्थानीय चाय उत्पादकों एवं लघु किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जिससे सतत आजीविका के अवसर सृजित हुए और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ हुई।

संगोष्ठी के तकनीकी सत्र की शुरुआत डॉ. अश्विनी महाजन के वक्तव्य से हुई। उन्होंने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि कुछ विकसित राष्ट्र एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बनाने का प्रयास करते हैं, किंतु भारत तकनीकी क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता के आधार पर सशक्त रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारत को वैश्विक स्तर पर विशिष्ट पहचान मिली है और वित्तीय समावेशन को नई दिशा प्राप्त हुई है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ सच्चिदानंद शुक्ला कुलपति पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय ने की इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 का लक्ष्य भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाना है। आज भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्था में शामिल है।

प्राचीन भारत ज्ञान विज्ञान व्यापार और संस्कृति का केंद्र था।उन्होंने विकसित भारत में युवाओं और शैक्षिक संस्थानों के महत्व को रेखांकित किया।


प्रोफेसर के.बी. दास ने झारखंड, ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ जैसे खनिज-समृद्ध राज्यों की खनन-आधारित औद्योगिक संरचना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल कच्चे खनिजों के उत्खनन एवं निर्यात पर आधारित विकास मॉडल दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। उन्होंने वैल्यू एडिशन, डाउनस्ट्रीम उद्योगों तथा फिनिश्ड प्रोडक्ट निर्माण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे स्थायी आर्थिक विकास और रोजगार सृजन सुनिश्चित हो सके।

सत्र के समापन अवसर पर डॉ. पी.के. घोष ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि सशक्त रक्षा व्यवस्था किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार एवं स्वदेशी उत्पादन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, ताकि आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को बल मिल सके।


संगोष्ठी का समापन प्रश्नोत्तर एवं सार्थक चर्चा के साथ हुआ। समग्र रूप से वक्ताओं ने समावेशी विकास, तकनीकी उन्नति, औद्योगिक वैल्यू एडिशन तथा सुदृढ़ रक्षा प्रणाली को विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अनिवार्य तत्व बताया।

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